दिव्य उल्लास का आरंभ: तुलसी विवाह मंगलाष्टक पर्व पूरे भारत में उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है
तुलसी विवाह का पर्व पूरे भारत में उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है। इस पावन पर्व पर माता तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह संपन्न होता है, जो हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है। देवोत्थान एकादशी के दिन इस विवाह के आयोजन से चारों ओर भक्तिभाव की अद्भुत अनुभूति होती है। यह धार्मिक परंपरा विवाह समारोह के रूप में कई राज्यों में धूमधाम से मनाई जाती है, जिसमें मंगलाष्टक जैसे भक्ति भरे गीतों का आयोजन भी किया जाता है, जो विवाह की रौनक को और बढ़ा देते हैं।
तुलसी विवाह का आयोजन हिंदू धर्म में वर्ष का विशेष उत्सव होता है, जो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा और मां तुलसी की आराधना का पर्व है। तुलसी को भगवान विष्णु की अर्धांगिनी माना जाता है और उनके इस विवाह से समृद्धि और शांति का प्रतीक माने जाने वाले कई धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। इस अवसर पर विभिन्न मंदिरों में भव्य समारोह आयोजित होते हैं, जहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और सभी लोग इस दिव्य विवाह में अपनी भागीदारी देते हैं। भक्तों का मानना है कि तुलसी विवाह में शामिल होने से जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि का वास होता है।
तुलसी विवाह की धार्मिक परंपरा भारतीय पौराणिक कथाओं से जुड़ी है, जहां तुलसी देवी को वृंदा देवी का अवतार माना गया है। उनके और भगवान विष्णु के विवाह को लेकर कई कथाएं हैं जो भक्ति और प्रेम के प्रतीक हैं। इस दिन भगवान शालिग्राम की मूर्ति का तुलसी के पौधे के साथ विवाह कराया जाता है, जिसे शादी के सभी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न किया जाता है। मंदिरों में विशेष सजावट होती है और प्रसाद का वितरण भी किया जाता है।
देशभर के विभिन्न क्षेत्रों में तुलसी विवाह के आयोजन का विशेष महत्व है। महाराष्ट्र और गुजरात में इसे बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, जहां मंगलाष्टक के भजनों के साथ तुलसी विवाह का माहौल भक्तिमय हो जाता है। खासतौर पर महाराष्ट्र में ‘तुलसी मंगलाष्टक’ गाने की परंपरा है, जो विवाह की पवित्रता और दिव्यता को बनाए रखती है। इस मंगलाष्टक का प्रत्येक शब्द भक्तों के मन में भक्ति का संचार करता है और सभी को एक साथ जोड़ता है।
तुलसी विवाह को लेकर खास तौर पर इस साल भक्तों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। विभिन्न मंदिरों और घरों में इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। भक्तजन इस विवाह में सहभागिता करने के लिए दूर-दूर से आ रहे हैं। इस दिन मंदिरों में फूलों की सजावट, दीपों की रोशनी और मंगल गीतों के साथ एक अलौकिक वातावरण बनता है, जिसमें हर भक्त को भक्ति रस में डूब जाने का अवसर मिलता है।
भक्तों का मानना है कि तुलसी विवाह में उपस्थित होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में खुशहाली आती है।



